नारकोटिक या साइकोट्रॉपिक ड्रग्स का उत्पादन, बिक्री, आयात, निर्यात या उपयोग कानूनन मना है जब तक कि वह मेडिकल या वैज्ञानिक कारणों से ना हो।
जानिए NDPS Act, 1985 – नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम, 1985
🔷 उद्देश्य (Objective):
इस अधिनियम का उद्देश्य है —
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नशे के व्यापार, उपयोग, उत्पादन, वितरण और तस्करी को रोकना,
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ड्रग्स से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण
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और मादक पदार्थों से समाज को सुरक्षित बनाना।
📑 अनुच्छेदवार (Section-wise) विवरण –
✅ अनुच्छेद 1: शीर्षक, विस्तार और प्रारंभ
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यह अधिनियम NDPS Act, 1985 कहलाता है।
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पूरे भारत में लागू है।
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केंद्र सरकार इस पर नियम बना सकती है।
✅ अनुच्छेद 2: परिभाषाएँ (Definitions)
कुछ मुख्य परिभाषाएँ:
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नारकोटिक ड्रग्स (Narcotic Drugs): अफीम, हेरोइन, मॉर्फिन आदि।
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साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (Psychotropic Substances): कोकीन, एलएसडी, MDMA आदि।
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प्रोड्यूस, मैन्युफैक्चर, ट्रैफिक – ड्रग्स बनाना, रखना, बेचना, ले जाना या तस्करी करना।
📌 उदाहरण:
अगर कोई व्यक्ति हेरोइन का उत्पादन कर रहा है या उसे किसी दूसरे शहर में ले जा रहा है, तो वह "ट्रैफिकिंग" कहलाएगा।
✅ अनुच्छेद 8: निषेध (Prohibition)
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नारकोटिक या साइकोट्रॉपिक ड्रग्स का उत्पादन, बिक्री, आयात, निर्यात या उपयोग कानूनन मना है जब तक कि वह मेडिकल या वैज्ञानिक कारणों से ना हो।
📌 उदाहरण:
डॉक्टर द्वारा दी गई मॉर्फिन दवा की अनुमति है, लेकिन अगर कोई बिना मेडिकल कारण के मॉर्फिन का सेवन करता है, तो वह अपराध है।
✅ अनुच्छेद 20: गांजा संबंधी अपराध
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गांजा का उत्पादन, कब्ज़ा, बिक्री या सेवन गैरकानूनी है।
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सज़ा की मात्रा गांजा की मात्रा पर निर्भर करती है:
| मात्रा | सज़ा |
|---|---|
| कम मात्रा (100 ग्राम तक) | 1 साल तक जेल या ₹10,000 जुर्माना या दोनों |
| वाणिज्यिक मात्रा (20 किलो से अधिक) | 10-20 साल जेल + ₹1-2 लाख जुर्माना |
📌 उदाहरण:
अगर किसी के पास 5 किलो गांजा मिलता है, तो उसे NDPS एक्ट के तहत 10 साल तक की सज़ा हो सकती है।
✅ अनुच्छेद 21: अन्य ड्रग्स पर अपराध
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जैसे – हेरोइन, कोकीन, एलएसडी आदि।
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इनकी मात्रा के अनुसार 6 महीने से लेकर 20 साल तक की सज़ा हो सकती है।
✅ अनुच्छेद 25: संपत्ति का उपयोग
अगर कोई व्यक्ति अपनी कार, घर या संपत्ति का उपयोग ड्रग्स की तस्करी के लिए करता है, तो वह संपत्ति ज़ब्त की जा सकती है।
📌 उदाहरण:
अगर कोई व्यक्ति ट्रक में ड्रग्स छुपाकर ले जा रहा है, तो ट्रक भी ज़ब्त हो सकता है।
✅ अनुच्छेद 27: व्यक्तिगत उपभोग
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अगर किसी के पास छोटी मात्रा में ड्रग्स है और वह केवल सेवन के लिए रखी गई है, तो सज़ा कम हो सकती है।
📌 उदाहरण:
किसी के पास 1 ग्राम हेरोइन पाई गई – तो उसे "पर्सनल कंजंप्शन" माना जा सकता है, और सुधार के लिए नशामुक्ति केंद्र भेजा जा सकता है।
✅ अनुच्छेद 31: सज़ा की पुनरावृत्ति (Repeat Offenders)
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अगर कोई व्यक्ति पहले भी NDPS के अंतर्गत दोषी पाया गया है और दोबारा वही अपराध करता है, तो सज़ा और ज़्यादा होगी।
📌 उदाहरण:
पहली बार 10 साल, दूसरी बार 15 साल तक की सज़ा हो सकती है।
✅ अनुच्छेद 36A: विशेष न्यायालय
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NDPS अपराधों के लिए Special Court का प्रावधान है, जो सिर्फ इन मामलों को सुनती है।
✅ अनुच्छेद 41 से 43: तलाशी और ज़ब्ती के अधिकार
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पुलिस को बिना वारंट के तलाशी लेने और ड्रग्स ज़ब्त करने का अधिकार है अगर उन्हें शक हो।
✅ अनुच्छेद 64A: इलाज के लिए छूट
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अगर कोई व्यक्ति पहली बार पकड़ा गया है और ड्रग्स का उपयोग केवल नशे के लिए कर रहा है, तो उसे इलाज का विकल्प दिया जा सकता है जेल के बजाय।
(FAQs)
❓ प्र. 1: NDPS Act क्या है?
उ. NDPS Act, 1985 एक केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून है, जिसका उद्देश्य भारत में मादक पदार्थों (Drugs) की तस्करी, उत्पादन, उपयोग और वितरण को रोकना है।
❓ प्र. 2: NDPS Act किन पदार्थों पर लागू होता है?
उ. यह अधिनियम नारकोटिक ड्रग्स (जैसे अफीम, हेरोइन) और साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (जैसे एलएसडी, कोकीन, एमडीएमए) पर लागू होता है।
❓ प्र. 3: NDPS Act के तहत किन कार्यों को अपराध माना जाता है?
उ.
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ड्रग्स का उत्पादन
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ड्रग्स का कब्ज़ा (Possession)
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बिक्री या वितरण
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तस्करी
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आयात/निर्यात
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बिना लाइसेंस के दवा निर्माण
❓ प्र. 4: NDPS Act के अंतर्गत कौन-कौन सी मुख्य धाराएँ हैं?
उ.
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धारा 8: निषेध (Prohibition)
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धारा 20: गांजा से जुड़े अपराध
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धारा 21: अन्य ड्रग्स से जुड़े अपराध
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धारा 25: संपत्ति के उपयोग पर दंड
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धारा 27: व्यक्तिगत सेवन से जुड़े मामले
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धारा 36A: विशेष न्यायालय
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धारा 64A: इलाज के लिए राहत
❓ प्र. 5: NDPS Act के तहत सज़ा क्या होती है?
उ.
सज़ा ड्रग की मात्रा पर निर्भर करती है:
| मात्रा | सज़ा |
|---|---|
| कम मात्रा (Personal use) | 1 साल तक जेल या ₹10,000 जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 साल तक की जेल |
| वाणिज्यिक मात्रा (Commercial) | 10–20 साल जेल + ₹1–2 लाख जुर्माना |
❓ प्र. 6: क्या NDPS Act के तहत जमानत मिल सकती है?
उ.
-
छोटे अपराधों (छोटी मात्रा) में जमानत मिल सकती है।
-
लेकिन वाणिज्यिक मात्रा में जमानत पाना बहुत कठिन है और कोर्ट की अनुमति से ही संभव है।
❓ प्र. 7: अगर किसी के पास बहुत कम मात्रा में ड्रग मिले तो क्या होगा?
उ.
अगर साबित हो जाए कि वह व्यक्तिगत उपभोग (Personal Consumption) के लिए है, तो NDPS Act की धारा 27 और 64A के तहत उसे इलाज का विकल्प दिया जा सकता है, जेल नहीं।
❓ प्र. 8: क्या पुलिस NDPS के मामलों में बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है?
उ.
हाँ, NDPS एक्ट की धारा 42-43 के अंतर्गत पुलिस को संदेह की स्थिति में बिना वारंट तलाशी, ज़ब्ती और गिरफ्तारी का अधिकार है।
❓ प्र. 9: NDPS Act में कौन-से अधिकारी जांच कर सकते हैं?
उ.
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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
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पुलिस अधिकारी
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केंद्रीय एजेंसियाँ (CBI, DRI)
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सीमा शुल्क अधिकारी
❓ प्र. 10: NDPS एक्ट के तहत ट्रायल कहां होता है?
उ.
NDPS एक्ट के गंभीर मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय (Special Courts) में होती है, जो इन मामलों की तेज़ और विशेष सुनवाई करते हैं।
❓ प्र. 11: क्या NDPS एक्ट के तहत संपत्ति भी ज़ब्त की जा सकती है?
उ.
हाँ, अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति (जैसे कार, घर, गोदाम) का उपयोग ड्रग्स की तस्करी या भंडारण के लिए करता है, तो उसे ज़ब्त किया जा सकता है।
❓ प्र. 12: NDPS Act में सुधार और पुनर्वास का क्या प्रावधान है?
उ.
धारा 64A के तहत, यदि कोई व्यक्ति पहली बार पकड़ा गया है और ड्रग्स सिर्फ सेवन के लिए रखी गई है, तो उसे नशा मुक्ति केंद्र (Rehabilitation) भेजा जा सकता है।
❓ प्र. 13: NDPS Act का उल्लंघन करने वालों को दोबारा अपराध करने पर क्या सज़ा है?
उ.
Repeat Offenders को पहली सज़ा से अधिक कठोर सज़ा दी जाती है — सज़ा 20 साल या उससे अधिक तक हो सकती है।


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