आज के डिजिटल युग में जब हम ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं या किसी सेवा के लिए ऑनलाइन भुगतान करते हैं, तो हमने देखा होगा कि व्यापारी को पूरी राशि नहीं मिलती। इ
जानिए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में MDR क्या होता है? जानिए मर्चेंट को हर ट्रांसक्शन पर कितना प्रतिशत चार्ज देना होता है
आज के डिजिटल युग में जब हम ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं या किसी सेवा के लिए ऑनलाइन भुगतान करते हैं, तो हमने देखा होगा कि व्यापारी को पूरी राशि नहीं मिलती। इसका कारण है – MDR, यानी Merchant Discount Rate। यह एक शुल्क है जो व्यापारी को बैंक या पेमेंट गेटवे को भुगतान करना पड़ता है।
MDR क्या है?
MDR (Merchant Discount Rate) एक फीस या प्रतिशत शुल्क होता है, जो हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर व्यापारी से लिया जाता है। यह शुल्क उस सेवा के बदले लिया जाता है जो बैंक या पेमेंट गेटवे ग्राहक और व्यापारी के बीच भुगतान प्रक्रिया को पूरा करने में प्रदान करते हैं।
MDR कौन वसूलता है?
MDR आमतौर पर तीन संस्थाओं के बीच बंटा होता है:
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एक्वायरिंग बैंक (Merchant का बैंक)
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इश्यूइंग बैंक (Customer का बैंक)
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पेमेंट गेटवे / कार्ड नेटवर्क (जैसे Visa, Mastercard, Paytm, Razorpay, आदि)
उदाहरण से समझें:
मान लीजिए आपने किसी वेबसाइट से ₹1,000 का सामान खरीदा और क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया।
अगर MDR दर 2% है, तो व्यापारी को केवल ₹980 मिलेंगे और ₹20 पेमेंट प्रोसेसर या बैंक को चला जाएगा।
MDR कौन देता है – ग्राहक या व्यापारी?
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आम तौर पर व्यापारी ही MDR का भुगतान करता है, ग्राहक नहीं।
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लेकिन कुछ वेबसाइट या एप्लिकेशन (जैसे क्रेडिट कार्ड से पेमेंट पर) यह शुल्क ग्राहक से वसूलते हैं।
भारत में विभिन्न पेमेंट मोड के लिए MDR दरें (2025 अनुमान):
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भुगतान विधि |
MDR दर (लगभग) |
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रूपे डेबिट कार्ड |
0% से 0.4% |
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अन्य डेबिट कार्ड |
0.4% से 0.9% |
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क्रेडिट कार्ड |
1.5% से 2.5% |
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UPI (₹2,000 तक) |
0% |
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UPI (₹2,000 से ऊपर) |
0.9% (कुछ गेटवे पर) |
नोट:
RBI ने छोटे व्यापारी और डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए UPI और रूपे कार्ड पर MDR को कुछ हद तक समाप्त कर दिया है या सीमित कर दिया है।
MDR क्यों जरूरी है?
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यह शुल्क बैंकों और पेमेंट गेटवे को उनके सिस्टम की सुरक्षा, संचालन और धोखाधड़ी रोकने जैसे कामों में मदद करता है।
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व्यापारी इसे बिजनेस कॉस्ट की तरह स्वीकार करते हैं।
MDR एक ऐसा शुल्क है जो डिजिटल लेन-देन को संभव बनाने वाली संस्थाओं को मिलता है। यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाता, बल्कि व्यापारी के हिस्से से काटा जाता है। हालांकि, यह शुल्क देश में डिजिटल भुगतान की वृद्धि और बैंकिंग सेवाओं के लिए जरूरी है।
FAQ
प्रश्न: MDR क्या होता है?
उत्तर: MDR (Merchant Discount Rate) वह शुल्क है जो व्यापारी को डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए बैंक या पेमेंट गेटवे को देना होता है।
प्रश्न: MDR कौन देता है – ग्राहक या व्यापारी?
उत्तर: सामान्यतः व्यापारी MDR का भुगतान करता है, न कि ग्राहक। हालांकि कुछ एप या वेबसाइट इसे ग्राहक से वसूल सकते हैं।
प्रश्न: ऑनलाइन पेमेंट पर MDR क्यों लिया जाता है?
उत्तर: यह शुल्क पेमेंट गेटवे और बैंक द्वारा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने, सुरक्षा देने और सिस्टम संचालन के लिए लिया जाता है।
प्रश्न: UPI पेमेंट पर भी MDR लगता है क्या?
उत्तर: ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगता। लेकिन कुछ मामलों में ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर MDR (0.9%) लग सकता है।
प्रश्न: क्रेडिट कार्ड से पेमेंट पर MDR कितना होता है?
उत्तर: आमतौर पर 1.5% से 2.5% तक का MDR शुल्क लिया जाता है।
प्रश्न: क्या MDR की दरें सभी के लिए समान होती हैं?
उत्तर: नहीं, यह पेमेंट मोड, बैंक, व्यापारी के टर्नओवर और अनुबंध पर निर्भर करती हैं।
प्रश्न: क्या सरकार ने किसी MDR को माफ किया है?
उत्तर: हां, डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रूपे कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर कुछ शर्तों के तहत MDR माफ किया है।
प्रश्न: व्यापारी को MDR क्यों स्वीकार करना पड़ता है?
उत्तर: डिजिटल भुगतान लेने के लिए यह एक आवश्यक लागत है, जिससे उन्हें ज्यादा ग्राहक और तेज ट्रांजैक्शन मिलते हैं।


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