भारत के संविधान में कुछ विशेष प्रावधान ऐसे हैं जो देश के कुछ खास इलाकों और समुदायों की संस्कृति, भूमि और पहचान की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। छठी अनुसूच
जानिए छठी अनुसूची (Schedule 6) क्या है? इस पर विवाद क्यों है, किन क्षेत्रों को इसका लाभ मिला है और कौन इसकी मांग कर रहा है
भारत के संविधान में कुछ विशेष प्रावधान ऐसे हैं जो देश के कुछ खास इलाकों और समुदायों की संस्कृति, भूमि और पहचान की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। छठी अनुसूची (Sixth Schedule) ऐसा ही एक प्रावधान है, जिसे लेकर आज देश के कई हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष देखने को मिल रहा है।
1. छठी अनुसूची क्या है?
छठी अनुसूची भारतीय संविधान का वह हिस्सा है जो पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी क्षेत्रों को विशेष स्वशासन (Autonomy) देता है।
सरल शब्दों में:
यह आदिवासी लोगों को अपने क्षेत्र का खुद प्रशासन चलाने का अधिकार देती है।
इसके तहत स्वायत्त जिला परिषदें (Autonomous District Councils – ADCs) बनाई जाती हैं।
2. छठी अनुसूची क्यों बनाई गई थी?
स्वतंत्रता के बाद यह समझा गया कि:
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आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराएं अलग हैं
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उनकी भूमि पर बाहरी कब्जे का खतरा है
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सामान्य राज्य कानून उनके लिए उपयुक्त नहीं हैं
इसीलिए संविधान में छठी अनुसूची जोड़ी गई।
3. छठी अनुसूची के अंतर्गत क्या विशेष अधिकार मिलते हैं?
छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों में:
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भूमि और जंगलों पर स्थानीय नियंत्रण
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आदिवासी परंपराओं और रीति-रिवाजों की सुरक्षा
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स्थानीय कानून बनाने की शक्ति
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छोटे विवादों के लिए स्थानीय न्याय व्यवस्था
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बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने पर रोक
महत्वपूर्ण बात:
राज्य सरकार के सभी कानून यहां सीधे लागू नहीं होते।
4. किन राज्यों को छठी अनुसूची का लाभ मिला है?
जिन राज्यों में छठी अनुसूची लागू है:
1. असम
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बोडोलैंड क्षेत्र
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कार्बी आंगलोंग
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दीमा हसाओ
2. मेघालय
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खासी हिल्स
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गारो हिल्स
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जयंतिया हिल्स
(लगभग पूरा राज्य)
3. त्रिपुरा
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त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल
4. मिजोरम
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चकमा
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लाई
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मारा स्वायत्त परिषदें
5. किन आदिवासी क्षेत्रों को छठी अनुसूची का लाभ नहीं मिला?
देश के कई आदिवासी बहुल राज्यों में छठी अनुसूची लागू नहीं है, जैसे:
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मणिपुर (पहाड़ी जिले)
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अरुणाचल प्रदेश
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नागालैंड
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झारखंड
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छत्तीसगढ़
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ओडिशा
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तेलंगाना
यहां अधिकतर क्षेत्रों में:
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पाँचवीं अनुसूची या
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सामान्य राज्य प्रशासन लागू है
6. छठी अनुसूची को लेकर विवाद क्यों है?
क्योंकि यह अनुसूची:
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भूमि की मजबूत सुरक्षा देती है
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राज्य सरकार की शक्ति कम कर देती है
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स्थानीय लोगों को वास्तविक निर्णय शक्ति देती है
मुख्य कारण:
(क) भूमि सुरक्षा
आदिवासी समुदाय डरते हैं कि:
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बाहरी लोग जमीन खरीद लेंगे
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बड़े उद्योग उनकी जमीन छीन लेंगे
छठी अनुसूची यह रोकती है।
(ख) संस्कृति और पहचान का संकट
लोग मानते हैं कि:
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बाहरी दखल से उनकी भाषा और संस्कृति खत्म हो सकती है
छठी अनुसूची इसे बचाने का माध्यम है।
(ग) कमजोर स्थानीय शासन
कई राज्यों में पहाड़ी परिषदें केवल नाम की हैं।
छठी अनुसूची उन्हें संवैधानिक ताकत देती है।
7. कौन-कौन से क्षेत्र छठी अनुसूची की मांग कर रहे हैं?
मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र
कुकी, नागा, जोमी समुदाय
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भूमि सुरक्षा
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राजनीतिक असमानता से बचाव
लद्दाख
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पर्यावरण सुरक्षा
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जमीन और रोजगार की रक्षा
अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्र
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बाहरी बसावट से बचाव
8. सरकार इसे देने में हिचक क्यों रही है?
क्योंकि:
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राज्य सरकारों की शक्ति कम हो जाती है
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प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ती हैं
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अन्य क्षेत्र भी यही मांग करने लगते हैं
9. एक सरल उदाहरण
बिना छठी अनुसूची:
राज्य सरकार ने एक फैक्ट्री को अनुमति दी।
आदिवासियों की जमीन चली गई।
उनकी सहमति जरूरी नहीं थी।
छठी अनुसूची के साथ:
स्थानीय परिषद की अनुमति जरूरी है।
अगर समुदाय मना करे – परियोजना रुक सकती है।
छठी अनुसूची आदिवासी समाज के लिए एक संवैधानिक सुरक्षा कवच है।
इसीलिए जिन क्षेत्रों को यह मिला है वे इसे खोना नहीं चाहते,
और जिन क्षेत्रों को नहीं मिला है वे इसे पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
FAQ
छठी अनुसूची (Schedule 6) क्या है?
छठी अनुसूची भारतीय संविधान का प्रावधान है जो कुछ आदिवासी क्षेत्रों को स्वशासन, भूमि सुरक्षा और स्थानीय कानून बनाने का अधिकार देता है।
छठी अनुसूची का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आदिवासी समाज की भूमि, संस्कृति, परंपरा और पहचान की रक्षा करना।
छठी अनुसूची किन क्षेत्रों में लागू है?
असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में।
छठी अनुसूची किन क्षेत्रों में लागू नहीं है?
मणिपुर (पहाड़ी क्षेत्र), अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना।
छठी अनुसूची के तहत कौन-सी संस्थाएं काम करती हैं?
स्वायत्त जिला परिषदें (Autonomous District Councils – ADCs)।
छठी अनुसूची में राज्य सरकार की भूमिका क्या होती है?
राज्य सरकार की शक्ति सीमित होती है; कई मामलों में परिषद की अनुमति जरूरी होती है।
छठी अनुसूची को लेकर विवाद क्यों है?
क्योंकि यह भूमि पर बाहरी नियंत्रण रोकती है और राज्य सरकार की ताकत घटाती है।
कौन-कौन से क्षेत्र छठी अनुसूची की मांग कर रहे हैं?
मणिपुर के पहाड़ी इलाके, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्र।
पाँचवीं और छठी अनुसूची में क्या अंतर है?
पाँचवीं अनुसूची में सीमित सुरक्षा होती है, जबकि छठी अनुसूची अधिक स्वायत्तता देती है।
छठी अनुसूची क्यों इतनी महत्वपूर्ण मानी जाती है?
क्योंकि यह आदिवासी समाज के लिए संवैधानिक सुरक्षा कवच का काम करती है।


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