जानिए रमज़ान के पवित्र त्योहार के बारे में : इसका इतिहास, महत्व, रोज़ा रखने की विधि और अवधि | Know about the holy festival of Ramadan: its history, significance, fasting rituals, and duration in hindi

रमज़ान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र और आध्यात्मिक महीना माना जाता है। यह आत्मसंयम, इबादत, दान और आत्मशुद्धि का समय होता है। दुनिया भर के मुसलमान इस महीन

जानिए रमज़ान के पवित्र त्योहार के बारे में : इसका इतिहास, महत्व, रोज़ा रखने की विधि और अवधि  

रमज़ान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र और आध्यात्मिक महीना माना जाता है। यह आत्मसंयम, इबादत, दान और आत्मशुद्धि का समय होता है। दुनिया भर के मुसलमान इस महीने में रोज़ा रखते हैं, कुरआन का पाठ करते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की कोशिश करते हैं। रमज़ान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक जीवन को संतुलित करने का माध्यम भी है।

Know about the holy festival of Ramadan

रमज़ान का इतिहास

रमज़ान का संबंध उस ऐतिहासिक घटना से है जब पैगंबर हज़रत मुहम्मद को पहली बार अल्लाह का संदेश प्राप्त हुआ था। इस घटना को इस्लाम में “वही” कहा जाता है। माना जाता है कि यह घटना मक्का के पास हिरा की गुफा में घटी थी। इसी महीने में पवित्र ग्रंथ कुरआन का अवतरण शुरू हुआ, इसलिए रमज़ान को अत्यंत पवित्र माना जाता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

रमज़ान का मुख्य उद्देश्य आत्मसंयम और आत्मशुद्धि है। इस महीने में रोज़ा रखकर व्यक्ति अपने मन, वाणी और कर्म को नियंत्रित करने का अभ्यास करता है।

  • यह दया, करुणा और दान की भावना बढ़ाता है।

  • गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा देता है।

  • आत्मानुशासन और आध्यात्मिक जागरूकता को मजबूत करता है।

मुस्लिम समुदाय का विश्वास है कि इस महीने में की गई इबादत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

रोज़ा रखने की विधि

रमज़ान में रोज़ा सूर्योदय से सूर्यास्त तक रखा जाता है। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. सहरी (पूर्वाह्न भोजन) – सूर्योदय से पहले भोजन किया जाता है।

  2. नियत – रोज़ा रखने की मन में प्रतिज्ञा की जाती है।

  3. दिनभर संयम – भोजन, पानी और बुरी आदतों से दूर रहना।

  4. इफ्तार – सूर्यास्त के बाद खजूर और पानी से रोज़ा खोला जाता है।

  5. तरावीह नमाज़ – रात में विशेष नमाज़ अदा की जाती है।

रमज़ान की अवधि

रमज़ान इस्लामी चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना है और इसकी अवधि 29 या 30 दिन होती है। इसकी शुरुआत चाँद दिखने से होती है और अंत भी चाँद दिखने पर होता है। अंतिम दिन के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है, जो रोज़ों के समापन का प्रतीक है।

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

रमज़ान केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस महीने में परिवार और समुदाय एक साथ इफ्तार करते हैं, मस्जिदों में नमाज़ पढ़ते हैं और आपसी भाईचारा बढ़ाते हैं। कई शहरों जैसे मदीना में विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है जहाँ लाखों लोग इबादत के लिए पहुँचते हैं।

रमज़ान आत्मसंयम, भक्ति और मानवता का प्रतीक है। यह केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि मन और आत्मा को शुद्ध करने का अवसर है। यह महीना व्यक्ति को धैर्य, सहानुभूति और आध्यात्मिकता का महत्व सिखाता है, जिससे वह बेहतर इंसान बनने की दिशा में अग्रसर होता है।

रमज़ान के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी

रमज़ान इस्लाम का अत्यंत पवित्र महीना है, लेकिन इसके धार्मिक महत्व के अलावा इसमें कई आध्यात्मिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पहलू भी जुड़े हुए हैं। नीचे रमज़ान से संबंधित गहन और रोचक जानकारी दी जा रही है।

1. रमज़ान नाम का अर्थ

“रमज़ान” शब्द अरबी मूल “रमदा” से निकला है, जिसका अर्थ है लाना या तपाना। इसका प्रतीकात्मक अर्थ है यह महीना इंसान के पापों को जला देता है और आत्मा को शुद्ध करता है।

2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस महीने का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इसी दौरान पैगंबर हज़रत मुहम्मद को पहली वह़ी (ईश्वरीय संदेश) प्राप्त हुई थी, जो कुरआन की शुरुआत मानी जाती है। यह घटना मक्का के पास हिरा की गुफा में हुई थी।

3. शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र)

रमज़ान के अंतिम दस दिनों में एक विशेष रात होती है जिसे लैलतुल क़द्र कहा जाता है।

  • इसे “हज़ार महीनों से बेहतर रात” माना जाता है।

  • मुसलमान पूरी रात इबादत करते हैं।

  • माना जाता है कि इसी रात कुरआन का अवतरण शुरू हुआ।

4. ज़कात और सदक़ा की परंपरा

रमज़ान दान का महीना भी है। इस दौरान मुसलमान:

  • ज़कात (अनिवार्य दान) देते हैं

  • सदक़ा (स्वैच्छिक दान) करते हैं

  • गरीबों को भोजन कराते हैं

यह सामाजिक समानता और करुणा की भावना को मजबूत करता है।

5. रोज़ा किन पर अनिवार्य नहीं है?

इस्लाम में रोज़ा रखने के नियम लचीले हैं। निम्न लोगों को छूट है:

  • बीमार व्यक्ति

  • गर्भवती महिलाएँ

  • वृद्ध लोग

  • यात्रा कर रहे लोग

  • छोटे बच्चे

ऐसे लोग बाद में रोज़ा पूरा कर सकते हैं या गरीबों को भोजन कराकर इसकी भरपाई कर सकते हैं।

6. रोज़े की अवधि क्यों बदलती रहती है?

रमज़ान चंद्र कैलेंडर पर आधारित है, इसलिए हर साल यह लगभग 10–11 दिन पहले आ जाता है।

  • कभी सर्दियों में छोटे रोज़े होते हैं

  • कभी गर्मियों में लंबे रोज़े (14–16 घंटे तक)

7. दुनिया भर में रमज़ान की परंपराएँ

हर देश में रमज़ान मनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है:

  • मध्य-पूर्व देशों में मस्जिदों में विशेष रोशनी और सामूहिक इफ्तार

  • तुर्की में ड्रम बजाकर सहरी जगाने की परंपरा

  • भारत और पाकिस्तान में बाज़ार रातभर खुले रहते हैं

  • मदीना और मक्का में लाखों लोग उमराह करने जाते हैं

8. वैज्ञानिक और स्वास्थ्य दृष्टि से फायदे

अनुशासित उपवास से कई स्वास्थ्य लाभ बताए जाते हैं:

  • पाचन तंत्र को आराम

  • शरीर का डिटॉक्स

  • मानसिक नियंत्रण

  • आत्म-अनुशासन

हालाँकि चिकित्सकीय स्थिति वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

9. रमज़ान का समापन — ईद की खुशी

रमज़ान के अंत में चाँद दिखाई देने पर रोज़े समाप्त होते हैं और ईद-उल-फितर मनाई जाती है। यह खुशी, कृतज्ञता और भाईचारे का त्योहार है।

विभिन्न देशों में रमज़ान कैसे मनाया जाता है? — अरब, पाकिस्तान, मध्य-पूर्व और अन्य मुस्लिम देशों की परंपराएँ

रमज़ान पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए एक पवित्र महीना है, लेकिन इसे मनाने के तरीके हर देश की संस्कृति, परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग-अलग होते हैं। नीचे विभिन्न क्षेत्रों में रमज़ान मनाने की खास झलक प्रस्तुत है।

अरब देशों में रमज़ान

अरब देशों जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और क़तर में रमज़ान अत्यंत धार्मिक वातावरण में मनाया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • मस्जिदों में पूरी रात तरावीह नमाज़

  • सार्वजनिक स्थानों पर इफ्तार टेंट (मुफ्त भोजन वितरण)

  • सड़कों और बाजारों में सजावट व रोशनी

  • धार्मिक व्याख्यान और कुरआन पाठ कार्यक्रम

इन देशों में सरकार भी कार्य समय कम कर देती है ताकि लोग इबादत पर ध्यान दे सकें।

पाकिस्तान में रमज़ान

पाकिस्तान में रमज़ान सामाजिक और पारिवारिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।

विशेष परंपराएँ:

  • सहरी जगाने के लिए ढोल बजाने की परंपरा

  • इफ्तार में समोसा, पकौड़े, फ्रूट चाट जैसी खास चीजें

  • टीवी पर धार्मिक कार्यक्रम और नात

  • ज़कात और दान का विशेष महत्व

यहाँ रमज़ान एक सामाजिक त्योहार जैसा माहौल भी बनाता है।

मध्य-पूर्व क्षेत्र

मध्य-पूर्व के देशों जैसे मिस्र, तुर्की और जॉर्डन में रमज़ान का माहौल बहुत रंगीन होता है।

मुख्य आकर्षण:

  • मिस्र में “फानूस” (रंगीन लालटेन) सजाने की परंपरा

  • तुर्की में सहरी जगाने के लिए ड्रमर

  • सामूहिक इफ्तार भोज

  • ऐतिहासिक मस्जिदों में विशेष नमाज़

अन्य मुस्लिम देशों में रमज़ान

इंडोनेशिया

दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश होने के कारण यहाँ रमज़ान राष्ट्रीय उत्सव जैसा होता है। लोग “मुदिक” परंपरा के तहत ईद से पहले अपने गाँव लौटते हैं।

मलेशिया

यहाँ “रमज़ान बाज़ार” लगते हैं जहाँ इफ्तार के लिए विशेष व्यंजन मिलते हैं।

बांग्लादेश

मस्जिदों में भीड़, दान-पुण्य और गरीबों को भोजन कराने की परंपरा प्रमुख है।

तुर्की

इफ्तार के समय तोप दागने की परंपरा और सामूहिक भोज यहाँ की खास पहचान है।

समान परंपराएँ जो हर देश में मिलती हैं

चाहे देश कोई भी हो, रमज़ान की कुछ परंपराएँ सार्वभौमिक हैं:

  • रोज़ा रखना

  • कुरआन पढ़ना

  • दान देना

  • तरावीह नमाज़

  • इफ्तार में परिवार का साथ

सऊदी अरब में रमज़ान 

सऊदी अरब में रमज़ान सिर्फ़ एक धार्मिक महीना नहीं बल्कि पूरे समाज की जीवनशैली बदल देने वाला आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव होता है। यहाँ इसका वातावरण दुनिया के अधिकांश देशों से अधिक भव्य, अनुशासित और धार्मिक रूप से गहन माना जाता है।

धार्मिक वातावरण

  • पूरे देश में मस्जिदें 24 घंटे सक्रिय रहती हैं, विशेषकर
    Masjid al-Haram (मक्का) और
    Al-Masjid an-Nabawi (मदीना) में लाखों लोग तरावीह और क़ियाम-उल-लैल की नमाज़ पढ़ते हैं।

  • रमज़ान के आख़िरी 10 दिनों में इबादत का चरम होता है।

रोज़ा और इफ़्तार परंपरा

  • इफ़्तार से पहले तोप दागने या सायरन बजाने की परंपरा कई शहरों में अब भी प्रतीकात्मक रूप में मौजूद है।

  • मस्जिदों, सड़कों और घरों के बाहर मुफ्त इफ़्तार टेंट लगाए जाते हैं जहाँ हर वर्ग के लोग साथ बैठकर रोज़ा खोलते हैं।

  • खजूर, अरब कॉफ़ी, सूप, समोसा जैसे स्नैक्स और पारंपरिक डिश “कब्सा” आम हैं।

सामाजिक व सरकारी व्यवस्थाएँ

  • सरकारी और निजी दफ़्तरों के समय घटा दिए जाते हैं।

  • स्कूलों में भी कम घंटे की कक्षाएँ होती हैं।

  • दिन में सार्वजनिक जगहों पर खाना-पीना प्रतिबंधित होता है (ग़ैर-मुस्लिमों पर भी लागू) — यह धार्मिक सम्मान का हिस्सा है।

बाज़ार और रात की ज़िंदगी

  • रात में बाज़ार, मॉल और कैफ़े देर रात तक खुले रहते हैं।

  • रमज़ान सेल और विशेष सजावट शहरों को उत्सव जैसा बना देती है।

ईद की तैयारी

  • आख़िरी दिनों में कपड़ों, उपहारों और मिठाइयों की ख़रीदारी चरम पर होती है।

  • ज़कात-अल-फ़ित्र देना अनिवार्य धार्मिक कर्तव्य माना जाता है।

संक्षेप में: सऊदी अरब में रमज़ान अत्यंत अनुशासित, सामूहिक और आध्यात्मिक रूप से गहन माह होता है, जहाँ धार्मिक आस्था, सामाजिक सेवा और पारिवारिक मिलन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

मज़ान पूरी दुनिया में अलग-अलग सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया जाता है, लेकिन उसका मूल उद्देश्य हर जगह एक ही रहता है — आत्मशुद्धि, ईश्वर की उपासना और मानवता की सेवा। यही कारण है कि रमज़ान केवल एक धार्मिक महीना नहीं बल्कि वैश्विक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है।

FAQ

रमज़ान क्या है?
रमज़ान इस्लामी चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसे मुसलमान उपवास, इबादत और आत्मशुद्धि के रूप में मनाते हैं।

रमज़ान का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
माना जाता है कि इसी महीने पैगंबर हज़रत मुहम्मद को पहली बार ईश्वरीय संदेश प्राप्त हुआ और पवित्र कुरआन का अवतरण शुरू हुआ।

रमज़ान कब शुरू और समाप्त होता है?
यह चाँद दिखने से शुरू होता है और 29 या 30 दिन बाद नए चाँद के साथ समाप्त होता है।

रोज़ा क्यों रखा जाता है?
रोज़ा आत्मसंयम, आध्यात्मिक शुद्धि, धैर्य और गरीबों के प्रति सहानुभूति विकसित करने के लिए रखा जाता है।

रोज़ा रखने की विधि क्या है?
सुबह सहरी के बाद नीयत करके सूर्योदय से सूर्यास्त तक भोजन-पानी और गलत आचरण से दूर रहा जाता है, फिर सूर्यास्त पर इफ्तार किया जाता है।

क्या सभी लोगों पर रोज़ा अनिवार्य है?
नहीं। बीमार, गर्भवती, बुजुर्ग, यात्रा कर रहे व्यक्ति और छोटे बच्चों को छूट होती है।

शब-ए-क़द्र क्या है?
रमज़ान के अंतिम दस दिनों में आने वाली एक पवित्र रात, जिसे हजार महीनों से बेहतर माना जाता है और इसमें विशेष इबादत की जाती है।

रमज़ान में दान क्यों दिया जाता है?
इस महीने ज़कात और सदक़ा देने से सामाजिक समानता बढ़ती है और जरूरतमंदों की सहायता होती है।

अरब देशों में रमज़ान कैसे मनाया जाता है?
सऊदी अरब जैसे देशों में मस्जिदों में विशेष नमाज़, सार्वजनिक इफ्तार और धार्मिक वातावरण इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।

पाकिस्तान में रमज़ान की खास परंपरा क्या है?
पाकिस्तान में सहरी जगाने के लिए ढोल बजाने और पारिवारिक इफ्तार भोज की परंपरा प्रसिद्ध है।

मध्य-पूर्व देशों में कौन-सी सजावट प्रसिद्ध है?
मिस्र में “फानूस” नामक रंगीन लालटेन सजाने की परंपरा रमज़ान की पहचान मानी जाती है।

दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश में रमज़ान कैसे मनाया जाता है?
इंडोनेशिया में रमज़ान राष्ट्रीय उत्सव जैसा होता है और लोग ईद से पहले अपने घर लौटते हैं।

तुर्की में रमज़ान की अनोखी परंपरा क्या है?
तुर्की में सहरी के समय ड्रम बजाने और इफ्तार के समय पारंपरिक संकेत देने की ऐतिहासिक परंपरा है।

रमज़ान का मुख्य संदेश क्या है?
आत्मसंयम, दया, सेवा, आध्यात्मिकता और मानवता की भावना को मजबूत करना ही रमज़ान का मूल उद्देश्य है।

रमज़ान का अंत किस त्योहार से होता है?
रमज़ान समाप्त होने पर ईद-उल-फितर मनाई जाती है, जो रोज़ों के पूर्ण होने की खुशी का प्रतीक है।

रमज़ान दुनिया भर में अलग-अलग तरीके से क्यों मनाया जाता है?
क्योंकि हर देश की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक रीति-रिवाज अलग होते हैं, इसलिए रमज़ान की बाहरी रस्में बदल जाती हैं, जबकि धार्मिक नियम समान रहते हैं।

अरब देशों में रमज़ान की सबसे खास बात क्या होती है?
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में मस्जिदों में विशेष नमाज़, सार्वजनिक इफ्तार और रातभर धार्मिक माहौल इसकी खास पहचान है।

पाकिस्तान में रमज़ान की कौन-सी परंपरा प्रसिद्ध है?
पाकिस्तान में सहरी के समय ढोल बजाकर लोगों को जगाने और खास इफ्तार व्यंजनों की परंपरा बहुत प्रसिद्ध है।

मध्य-पूर्व देशों में रमज़ान सजावट क्यों खास होती है?
मिस्र जैसे देशों में “फानूस” (रंगीन लालटेन) सजाने की परंपरा है, जो खुशी और आध्यात्मिक प्रकाश का प्रतीक मानी जाती है।

सबसे बड़े मुस्लिम देश में रमज़ान कैसे मनाया जाता है?
इंडोनेशिया में रमज़ान राष्ट्रीय उत्सव जैसा होता है और लोग ईद से पहले “मुदिक” परंपरा के तहत अपने घर लौटते हैं।

क्या रमज़ान की मूल परंपराएँ सभी देशों में समान होती हैं?
हाँ। रोज़ा रखना, कुरआन पढ़ना, दान देना, तरावीह नमाज़ और इफ्तार करना — ये मूल परंपराएँ हर देश में समान रूप से निभाई जाती हैं।

तुर्की में रमज़ान की कौन-सी अनोखी परंपरा है?
तुर्की में सहरी के समय ड्रम बजाने और इफ्तार के समय तोप चलाने की परंपरा ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध है।

रमज़ान का मुख्य संदेश क्या है?
आत्मसंयम, दया, सेवा, आध्यात्मिक शुद्धि और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देना ही रमज़ान का मूल संदेश है।


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